बेटी का दर्द ना समझा कोई
अपने ही सपनो को तोड़ कर वो रोई
सब्र का इम्तहा लिया उसका ऐसा
की कभी सती बनकर जली
तो कभी बाल विवाह में पली बड़ी
आखो से आंसू निकलने ना दिया पर
दिल ही दिल में खूब रोई
बेटी का दर्द ना समझा कोई
अनुज बिष्ट
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great yaar
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