ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़ते है उमड़ते है
छूने को आसमान
पाने को एक पहचान
सैलाब जैसे उठते है
ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़ते है उमड़ते है
इन्द्रधनुष के रंगो से चमकते है
कभी गीली मिटटी कि खुशबु में पिघलते है
देख के आंसू दिल में सिमटते है
तो कभी सपनो के बादलो में मचलते है
ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़ते है उमड़ते है
Vipin लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Vipin लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शुक्रवार, मार्च 24, 2017
ख्वाब मेरें
बुधवार, जुलाई 04, 2012
जाने कैसी जिद है
दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी
द्वारा आयोजित "वार्षिक कविता पाठ प्रतियोगीता 2012"
में कवि विपिन अरोड़ा
की दिल को छू लेने वाली कविता
जाने कैसी जिद है
कवि - विपिन
शुक्रवार, सितंबर 23, 2011
में क्या लिख पाउँगा
में क्या लिख पाउँगा
शब्दों में
माँ बेटी के दिल की वो बात
माँ के आसुओ में छुपी
ममता
बिटिया के आखों के सपने
भैया की छोटी
वो नोक झोक
वो लड़ना झगड़ना
में क्या लिख पाउँगा
शब्दों में
पिता की लाडली
नन्ही सी गुडिया
चली बसाने एक नया संसार
में क्या लिख पाउँगा
शब्दों में
वो अनोखा सा अहसास
वो हालत
वो विदाई की वो रात
में क्या लिख पाउँगा
शब्दों में
बुधवार, अगस्त 03, 2011
चित्राई यादो के साये मे
विपिन अरोडा
छलक उठा है एक तारा
चित्राई यादो के साये मे
जिंदगी भरती है करवटे
कभी तपता हुआ धूप का साया
तो कभी पहली बारिश की पहली बूँद
तो कभी बुजुर्ग नीम की ठडी छाव का साया
छलक उठा है एक तारा
चित्राई यादो के साये मे
ॠतुओ सी बदलती ये जिंदगी
कभी बस्ता डाल के स्कूल को जाना
तो कभी बस्ता डाल के आफ़िसो के चक्कर लगाना
कभी गाव का पुराना आंगन
तो कभी दादी की कहानियों मे खो जाना
छलक उठा है एक तारा
चित्राई यादो के साये मे
बीते हुए लम्हो मे
दरिया किनारे बैठ कर
पानी मे पत्थर को तैराना
तो कभी आंगन मे बैठे
मीठे सितारे चुगते मोर को
देखते देखते सपनो मे खो जाना
छलक उठा है एक तारा
चित्राई यादो के साये मे
गुरुवार, जून 09, 2011
अब तो कुछ करना होगा ।
भ्रष्टाचार आज भारत के लिये एक ऐसी चुनौती बन गया है जिससे हम सब भारत वासियों को मिल कर लडना होगा। श्री अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के संघर्ष मे हम सब को भी उनका साथ देना चाहिए। हम सब को मिल कर भ्रष्टाचार के खिलाफ़ आवाज उठानी चाहिए। हमारा आने वाला कल हमारे आज के उठाये कदमों से सवर सकता है। यदि हम भ्रष्टाचार को जड से उखाड फेंकने की शपथ ले और अपना योगदान दे तो हमारा आने वाला भविष्य सुरक्षित और आने वाली पीडी का भविष्य उज्जवल होगा।

आजादी के 64 वर्षो के बाद भी आज हमारा भारत भ्रष्टाचार की गुलामी से लड रहा है। हमारे भारत की असली आजादी हमे भ्रष्टाचार से मुक्ति पाने के बाद ही मिलेगी। भ्रष्टाचार लकडी मे लगे उस दीमक की तरह है जो लकडी को खोखला कर देती है। भ्रष्टाचार आज भारत को खोखला करता जा रहा है। अपने भविष्य और अपनी भावी पीडी के अस्तित्व के लिये हमे आज भ्रष्टाचार से दो चार होना पडेगा।
आशा करता हू सभी भारत वासी भ्रष्टाचार के खिलाफ़ एक जुट होकर अपने भारत कि रक्षा करेंगे।
भारत माता की जय।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
प्रदूषण नियंत्रण
आजकल उत्तर भारत में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया हैं और अगर ये कहे कि ये सिर्फ दिल्ली या उससे जुड़े हुए राज्यो तक सीमित हैं तो कहना गलत होगा ।...
-
ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़ते है उमड़ते है छूने को आसमान पाने को एक पहचान सैलाब जैसे उठते है ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़त...
-
सॉवरे की बनसी में सब सुर बसते हैं एक दरस की चाह में नैनं तरसे हैं सिर पर मोर पंखी वाणी से अमृत् छलके हैं ऑखो में...
-
दीये की ओ ट तले पलता हैं एक अंधेरा सब कुछ देख कर भी खामो श हैं ये अंधेरा यू तो रो श नी का प्रतीक हैं दीया पर जब जलता हैं तो पनपता हैं एक अं...


