रविवार, अगस्त 18, 2019

ब्लॉग कि एक नई शुरुआत

लिखने का बीज तो वर्ष 2004 में ही बो दिया था परंतु सीमित ज्ञान और सही दिशा के अभाव में यह बीज पनप ना सके । अब सोचता हूं कि कुछ अच्छा और सच्चा लिखना शुरू कर दूं ।


करीब पंद्रह साल लगा दिए सिर्फ यह सोचने में कि अपनी सोच को कैसे लोगो तक पहुचाऊं । अगर ये कहूँ कि हिंदी और लिखने से दूर था तो गलत होगा पर ये सच हैं कि नाम की चाहत में बहुत समय बर्बाद कर दिया । जो भी अब तक लिखा और जो लिखूंगा वह सब लिखूंगा इस ब्लाग पर ताकि आपको कुछ अच्छा और सच्चा पड़ने को मिले ।


कभी कविता कभी कहानी ।
हिंदी में शब्दों कि जुबानी ।।
सच्ची और अच्छी रचनाएँ ।
बस अब सबको पढाये ।।
~विपिन


हिंदी का प्रखर जानकार तो नहीं हूं परन्तु कोशिश करूंगा कि भाषा मे त्रुटि ना हो । यदि कोई गलती हो भी जाये तो मुझे सुधारने में सहायता करें । आपका साथ और पढ़ने वालों से सच्चे विवरण कि आशा करता हूँ ।


धन्यवाद


सोमवार, अप्रैल 17, 2017

मीठी बातें

ले रहा हूँ नाम तेरा जैसे ले रहा हूँ साँसे ।
भूल कर भी भूल ना पाऊं तेरी मीठी बातें ।।

शुक्रवार, मार्च 24, 2017

ख्वाब मेरें

ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़ते है उमड़ते है
छूने को आसमान
पाने को एक पहचान
सैलाब जैसे उठते है
ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़ते है उमड़ते है
इन्द्रधनुष के रंगो से चमकते है
कभी गीली मिटटी कि खुशबु में पिघलते है
देख के आंसू दिल में सिमटते है
तो कभी सपनो के बादलो में मचलते है
ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़ते है उमड़ते है

बुधवार, जुलाई 04, 2012

जाने कैसी जिद है


दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी

द्वारा आयोजित  "वार्षिक  कविता  पाठ  प्रतियोगीता  2012"
में  कवि  विपिन  अरोड़ा 
की दिल को छू लेने वाली कविता 

जाने कैसी जिद है  



                                                              कवि - विपिन 
                                                               


मजहब की लड़ाई

दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी

द्वारा आयोजित  "वार्षिक  कविता  पाठ  प्रतियोगीता  2012"
में  कवि  अनुज  बिष्ट 
की दिल को छू लेने वाली कविता 

मजहब  की  लड़ाई 


                      

कवि - अनुज बिष्ट 

शुक्रवार, सितंबर 23, 2011

में क्या लिख पाउँगा

में क्या लिख पाउँगा
शब्दों में 
विदाई की वो रात 
माँ बेटी के दिल की वो बात  
माँ के आसुओ में छुपी 
ममता 
बिटिया के आखों के सपने  
भैया की छोटी 
वो नोक झोक 
वो लड़ना झगड़ना  
में क्या लिख पाउँगा
शब्दों में 
पिता की लाडली 
नन्ही सी गुडिया 
चली बसाने एक नया संसार 
में क्या लिख पाउँगा  
शब्दों में  
वो अनोखा सा अहसास 
वो हालत 
वो विदाई की वो रात 
में क्या लिख पाउँगा
शब्दों में

बुधवार, अगस्त 03, 2011

चित्राई यादो के साये मे


विपिन अरोडा              
छलक उठा है एक तारा
चित्राई यादो के साये मे
जिंदगी भरती है करवटे
कभी तपता हुआ धूप का साया
तो कभी पहली बारिश की पहली बूँद
तो कभी बुजुर्ग नीम की ठडी छाव का साया
छलक उठा है एक तारा
चित्राई यादो के साये मे
ॠतुओ सी बदलती ये जिंदगी
कभी बस्ता डाल के स्कूल को जाना
तो कभी बस्ता डाल के आफ़िसो के चक्कर लगाना
कभी गाव का पुराना आंगन
तो कभी दादी की कहानियों मे खो जाना
छलक उठा है एक तारा
चित्राई यादो के साये मे
बीते हुए लम्हो मे
दरिया किनारे बैठ कर
पानी मे पत्थर को तैराना
तो कभी आंगन मे बैठे
मीठे सितारे चुगते मोर को
देखते देखते सपनो मे खो जाना
छलक उठा है एक तारा
चित्राई यादो के साये मे

                                                           
                                 

प्रदूषण नियंत्रण

आजकल उत्तर भारत में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया हैं और अगर ये कहे कि ये सिर्फ दिल्ली या उससे जुड़े हुए राज्यो तक सीमित हैं तो कहना गलत होगा ।...