शुक्रवार, जुलाई 16, 2010

कलम से छलके होंगे ऑसु

 
सुनो ए दुनिया वालो
सुनी सुनाई ना ये बात होगी
मेरे दिल के अरमानो की
आज अंतिम रात होगी
उग गई हैं कागज पर खेती
कलम से ये करामात होगी
मेंरी कविता की हर बात निराली होगी
हर पन्ने में एक खुशभु डाली होगी
कलम से छलके होंगे ऑसु
ऑखो में बरसात होगी
दिल रोता होगा कई कवियो का                    
दिल मेंरा भी रोएगा पर जब
कलम ना अपने साथ होगी
मेंरी कविता की हर बात निराली होगी
मर कर भी मैं हो जाउॅगा अमर
यादों से निकल छप जाउॅगा मैं पन्नो पर            
मेंरी जिंदगी की दास्ता
हर पन्ने पर शुमार होगी
जब मेरे नाम की अपनी किताब होगी         
मेंरी कविता की हर बात निराली होगी
बस इतना ही हैं कहना
कागज कलम संग हैं रहना
मैं कवि हूँ जीता हूँ कलम से
मरता हूँ कलम से
मेरी हर कविता का हैं सार कलम से
शब्दो को लगे हैं अलंकार कलम से
कागज का हुआ हैं अवतार कलम से
उमडता हैं मन में विचारो का सैलाब कलम से
ऑखो पर हैं अंधेरा दिल में बस्ता हैं हिंदुस्तान कलम से
मैं कवि हूँ जीता हूँ कलम से
मरता हूँ कलम से

                                           विपिन
                                       

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