रविवार, जुलाई 18, 2010

बेटियॉ

कोरी किताब होती हैं बेटियॉ ।
दिल की साफ होती हैं बेटियॉ ॥
   मन की विशाल होती हैं बेटियॉ ।
   एक प्रकार की मिसाल होती हैं बेटियॉ ॥
फर्ज की राह पर चलते हुए ।
खुद को मिटा देती हैं बेटियॉ ॥
   बेटी, पत्नी, मॉ के रुप में ।
   जीवन अपना बिता देती हैं बेटियॉ ॥
बेटों से अधिक जीवन में ।
खुशिया ला देती हैं बेटियॉ ॥
बाप को स्वर्ग की सीढियॉ ।
चढा देती हैं बेटियॉ ॥
कोरी किताब होती हैं बेटियॉ ।
दिल की साफ होती हैं बेटियॉ ॥

                        विपिन 

1 टिप्पणी:

  1. प्रिय विपिन
    तुम्हारे में सीखने की लगन है, कुछ करने की चाह है, यंग हो इसलिए उत्साह भी अधिक होगा तुममें। अपने विचारों को अभिव्यक्ति देने का तुम्हारा यह बहुत अच्छा प्रयास है। तुम इसे जारी रखो, लेकिन ध्यान रहे कि तुम्हारी पढ़ाई-लिखाई में बाधा न पड़े। किसी भी कीमत पर। अच्छा पढ़ो, अच्छा सोचो, अच्छा करो, और अच्छा लिखो। नि:संदेह एक दिन सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी। मेरी शुभकामनाएं तुम्हाहे साथ हैं।

    तुम्हारे ब्लॉग में शब्दों को लेकर अशुद्धियां हैं, उन पर ध्यान दो कि उनका दुहराव न हो। हो सके तो एडिटिंग में जाकर उन्हें शुद्ध कर लो, जैसे की ब्लॉग के टाइटिल में ही गलती है, "विचारों की उड़ान" होना चाहिए। मात्राएं सही होनी चाहिए, छुट पुट अशुद्धियां तो हिन्दी की यूनिकोड टाइपिंग के चलते हो ही जाती हैं, इसमें घबराने और निरुत्साहित होने की बात नहीं है, धीरे धीर सब ठीक होता चला जाएगा।
    सुभाष नीरव

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