बुधवार, अगस्त 03, 2011

चित्राई यादो के साये मे


विपिन अरोडा              
छलक उठा है एक तारा
चित्राई यादो के साये मे
जिंदगी भरती है करवटे
कभी तपता हुआ धूप का साया
तो कभी पहली बारिश की पहली बूँद
तो कभी बुजुर्ग नीम की ठडी छाव का साया
छलक उठा है एक तारा
चित्राई यादो के साये मे
ॠतुओ सी बदलती ये जिंदगी
कभी बस्ता डाल के स्कूल को जाना
तो कभी बस्ता डाल के आफ़िसो के चक्कर लगाना
कभी गाव का पुराना आंगन
तो कभी दादी की कहानियों मे खो जाना
छलक उठा है एक तारा
चित्राई यादो के साये मे
बीते हुए लम्हो मे
दरिया किनारे बैठ कर
पानी मे पत्थर को तैराना
तो कभी आंगन मे बैठे
मीठे सितारे चुगते मोर को
देखते देखते सपनो मे खो जाना
छलक उठा है एक तारा
चित्राई यादो के साये मे

                                                           
                                 

गुरुवार, जून 09, 2011

अब तो कुछ करना होगा ।


भ्रष्टाचार आज भारत के लिये एक ऐसी चुनौती बन गया है जिससे हम सब भारत वासियों को मिल कर लडना होगा। श्री अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के संघर्ष मे हम सब को भी उनका साथ देना चाहिए। हम सब को मिल कर भ्रष्टाचार के खिलाफ़ आवाज उठानी चाहिए। हमारा आने वाला कल हमारे आज के उठाये कदमों से सवर सकता है। यदि हम भ्रष्टाचार को जड से उखाड फेंकने की शपथ ले  और अपना योगदान दे तो हमारा आने वाला भविष्य सुरक्षित और आने वाली पीडी का भविष्य उज्जवल होगा।


आजादी के 64 वर्षो के बाद भी आज हमारा भारत भ्रष्टाचार की गुलामी से लड रहा है। हमारे भारत की असली आजादी हमे भ्रष्टाचार से मुक्ति पाने के बाद ही मिलेगी। भ्रष्टाचार लकडी मे लगे उस दीमक की तरह है जो लकडी को खोखला कर देती है। भ्रष्टाचार आज भारत को खोखला करता जा रहा है। अपने भविष्य और अपनी भावी पीडी के अस्तित्व के लिये हमे आज भ्रष्टाचार से दो चार होना पडेगा।

आशा करता हू सभी भारत वासी भ्रष्टाचार के खिलाफ़ एक जुट होकर अपने भारत कि रक्षा करेंगे।


भारत माता की जय।

बुधवार, जनवरी 12, 2011

कलम से

आज नाता जोडा हैं तो कल भी
नाता रहेगा कलम से
अपनी जिंदगी के कोरे पन्नो को
स्याही का रंग देता हूँ कलम से
कभी मन की भावनाओं को
हूब हू उतार देता हूँ कलम से
तो कभी बारिश की रिमझिम बूंदो को
हलके से चख लेता हूँ कलम से
कभी ऑखो के समुद्र में गोते लगा के
ऑसुओं को ही उतार देता हूँ कलम से
यही व्यथा हैं मेरी जिंदगी में
हैं ये जिंदगी आज भी कलम से
कभी आसमान को ही बटोर के
रख लेता हूँ कलम से
तो कभी अंधेरे में चुपके से दीप जला के
सुबह की भोर दिखा देता हूँ कलम से
कभी फूलो के कच्चे रस को
भौरो सा पी जाता हूँ कलम से
तो कभी जिस्म का सारा दर्द
खुशी खुशी उतार देता हूँ कलम से
यही व्यथा हैं मेरी जिंदगी में
हैं ये जिंदगी आज भी कलम से



अनुज बिष्ट

रविवार, जुलाई 18, 2010

बेटियॉ

कोरी किताब होती हैं बेटियॉ ।
दिल की साफ होती हैं बेटियॉ ॥
   मन की विशाल होती हैं बेटियॉ ।
   एक प्रकार की मिसाल होती हैं बेटियॉ ॥
फर्ज की राह पर चलते हुए ।
खुद को मिटा देती हैं बेटियॉ ॥
   बेटी, पत्नी, मॉ के रुप में ।
   जीवन अपना बिता देती हैं बेटियॉ ॥
बेटों से अधिक जीवन में ।
खुशिया ला देती हैं बेटियॉ ॥
बाप को स्वर्ग की सीढियॉ ।
चढा देती हैं बेटियॉ ॥
कोरी किताब होती हैं बेटियॉ ।
दिल की साफ होती हैं बेटियॉ ॥

                        विपिन 

शनिवार, जुलाई 17, 2010

एक दरस की चाह में

    


सॉवरे की बनसी में
सब सुर बसते हैं
एक दरस की चाह में
नैनं तरसे हैं
सिर पर मोर पंखी
वाणी से अमृत् छलके हैं
ऑखो में साजे तेज
मुस्कान् में तारे सजते हैं
वृंदावन् के कण कण में
सॉवरे बसते हैं
नटखट हैं चक्र-धारी
लीला-धर प्रेम से मिलते हैं
माखन रुपी प्रसाद की चाह में
दर बदर जिंदगी भटके हैं
सॉवरे की बनसी में
सब सुर बसते हैं
एक दरस की चाह में
नैनं तरसे हैं

                                       विपिन 
                                                      

कवि की कल्पना

उड चला कवि का मन
आज उड चला

भीतर के पट खोल
किसी आवारा पंछी सम
आसमा की छत छूने
उड चला कवि का मन
                            मापने सागर की गहराई
                            छूने तारो की परछार्इ्र
                            किसी घुमक्कड पतंग सम
                            उड चला कवि का मन
घास पर पडी ओंस की बूंद
के र्स्पश् को छूने
बाग में मुड चला
उड चला कवि का मन
                            किन्ही सपनो भरी ऑखो
                            की गहराई में घुलने
                            आशा रुपी दिये के
                            प्रकाश् में मिलने को

उड चला कवि का मन
आज उड चला

                           विपिन 

कलम से

जिंदगी का नाता जुडा हैं कलम से      
विश्वास का धागा बंधा हैं कलम से
भावनाओं के चित्रो को
रंग मिला हैं कलम से
मेंरी सोच का उदय
हुआ हैं कलम से
अब ख्यालो की दुनिया
रोशन हैं कलम से
सपनो को लगे हैं पंख
विचारो का विकास हुआ हैं कलम से
दुखो,परेशानियों,पीडा की धूप में
वट वृक्ष की छाया का अनुभव
मिला हैं कलम से
विरानियों,तनहाइयों में
दोस्ती का साथ मिला हैं कलम से
जिंदगी का नाता जुडा हैं कलम से 
विश्वास का धागा बंधा हैं कलम से

                              विपिन

प्रदूषण नियंत्रण

आजकल उत्तर भारत में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया हैं और अगर ये कहे कि ये सिर्फ दिल्ली या उससे जुड़े हुए राज्यो तक सीमित हैं तो कहना गलत होगा ।...