शनिवार, नवंबर 02, 2019
प्रदूषण नियंत्रण
रविवार, अगस्त 18, 2019
ब्लॉग कि एक नई शुरुआत
लिखने का बीज तो वर्ष 2004 में ही बो दिया था परंतु सीमित ज्ञान और सही दिशा के अभाव में यह बीज पनप ना सके । अब सोचता हूं कि कुछ अच्छा और सच्चा लिखना शुरू कर दूं ।
करीब पंद्रह साल लगा दिए सिर्फ यह सोचने में कि अपनी सोच को कैसे लोगो तक पहुचाऊं । अगर ये कहूँ कि हिंदी और लिखने से दूर था तो गलत होगा पर ये सच हैं कि नाम की चाहत में बहुत समय बर्बाद कर दिया । जो भी अब तक लिखा और जो लिखूंगा वह सब लिखूंगा इस ब्लाग पर ताकि आपको कुछ अच्छा और सच्चा पड़ने को मिले ।
कभी कविता कभी कहानी ।
हिंदी में शब्दों कि जुबानी ।।
सच्ची और अच्छी रचनाएँ ।
बस अब सबको पढाये ।।
~विपिन
हिंदी का प्रखर जानकार तो नहीं हूं परन्तु कोशिश करूंगा कि भाषा मे त्रुटि ना हो । यदि कोई गलती हो भी जाये तो मुझे सुधारने में सहायता करें । आपका साथ और पढ़ने वालों से सच्चे विवरण कि आशा करता हूँ ।
धन्यवाद
सोमवार, अप्रैल 17, 2017
शुक्रवार, मार्च 24, 2017
ख्वाब मेरें
ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़ते है उमड़ते है
छूने को आसमान
पाने को एक पहचान
सैलाब जैसे उठते है
ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़ते है उमड़ते है
इन्द्रधनुष के रंगो से चमकते है
कभी गीली मिटटी कि खुशबु में पिघलते है
देख के आंसू दिल में सिमटते है
तो कभी सपनो के बादलो में मचलते है
ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़ते है उमड़ते है
बुधवार, जुलाई 04, 2012
जाने कैसी जिद है
कवि - विपिन
मजहब की लड़ाई
शुक्रवार, सितंबर 23, 2011
में क्या लिख पाउँगा
बुधवार, अगस्त 03, 2011
चित्राई यादो के साये मे
गुरुवार, जून 09, 2011
अब तो कुछ करना होगा ।

आजादी के 64 वर्षो के बाद भी आज हमारा भारत भ्रष्टाचार की गुलामी से लड रहा है। हमारे भारत की असली आजादी हमे भ्रष्टाचार से मुक्ति पाने के बाद ही मिलेगी। भ्रष्टाचार लकडी मे लगे उस दीमक की तरह है जो लकडी को खोखला कर देती है। भ्रष्टाचार आज भारत को खोखला करता जा रहा है। अपने भविष्य और अपनी भावी पीडी के अस्तित्व के लिये हमे आज भ्रष्टाचार से दो चार होना पडेगा।
आशा करता हू सभी भारत वासी भ्रष्टाचार के खिलाफ़ एक जुट होकर अपने भारत कि रक्षा करेंगे।
भारत माता की जय।
बुधवार, जनवरी 12, 2011
कलम से
रविवार, जुलाई 18, 2010
बेटियॉ
शनिवार, जुलाई 17, 2010
एक दरस की चाह में
कवि की कल्पना
किसी घुमक्कड पतंग सम
उड चला कवि का मन
कलम से
शुक्रवार, जुलाई 16, 2010
कलम से छलके होंगे ऑसु
दीये की ओट तले
बेटी का दर्द
अपने ही सपनो को तोड़ कर वो रोई
सब्र का इम्तहा लिया उसका ऐसा
की कभी सती बनकर जली
तो कभी बाल विवाह में पली बड़ी
आखो से आंसू निकलने ना दिया पर
दिल ही दिल में खूब रोई
बेटी का दर्द ना समझा कोई
अनुज बिष्ट
प्रदूषण नियंत्रण
आजकल उत्तर भारत में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया हैं और अगर ये कहे कि ये सिर्फ दिल्ली या उससे जुड़े हुए राज्यो तक सीमित हैं तो कहना गलत होगा ।...
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सॉवरे की बनसी में सब सुर बसते हैं एक दरस की चाह में नैनं तरसे हैं सिर पर मोर पंखी वाणी से अमृत् छलके हैं ऑखो में...
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ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़ते है उमड़ते है छूने को आसमान पाने को एक पहचान सैलाब जैसे उठते है ख्वाब मेरे नन्हे नन्हे छोटे छोटे उड़त...
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दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा आयोजित "वार्षिक कविता पाठ प्रतियोगीता 2012" में कवि अनुज बिष्ट की दिल को छू लेने...



